एक कॉलेज की लड़की (एक भूत कहानी)

                                   एक कॉलेज की लड़की (एक भूत कहानी)

 दौड़ते दौड़ते में ट्रेन के अंदर  2 कोच  पार करके तीसरी में पहुंचा तब बहीं  काफी भीड़ थी ,मैं बाहर घड़ी भर सांस लेने का रोका  | मेरा नाम राज है  ,2 दिन पहले इंजीनियरिंग में ऐडमिशन लेने दिल्ली आया था |पापा हमेशा चाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं और मुझे इंजीनियर और म्यूजिक में बहुत इंट्रेस्ट  था |
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 कॉलेज
आज मेरा  कॉलेज का पहला दिन था |  हॉस्टल और कॉलेज मे मेरा कोई  पुराना नया दोस्त या  जाने वाला कोई भी नहीं था    कॉलेज के पास पहुंचा देखा कि एक लड़की कॉलेज के गेट के पास   सबक सबकी रो रहा था|  कोई भी उसकी और ध्यान नहीं दिया किस को कोई परवाह  ही नहीं|  बिचारी बार-बार इधर उधर कदम करके हॉट ही रहा था की  धाका   ना लग जाए| क्या कोई किसीको फरक  पढ़ नहीं रहा है | मुझे  बो लकड़ी   फ्रेशर लग रही थी|  पास जाकर  मैंने उससे पूछा कि कोई चोट नहीं लगा  है  और कुछ न बोल  का  लड़की बस  रोती रही और कुछ भी नहीं कहा? मैंने उसको कई बार पूछा और उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया  शायद वह किसी सीनियर से    डर रही थी|   मेरे ऊपरकुछ  स्टूडेंट हंसकर और मेरे पास गुजर गए|  कुछ सीनियर मेरे पास आकर बोला अबे पागल हो गया क्या भाई किससे बात कर रहा है, मैंने कहा कि आप लोगों को दिखा ही नहीं  दे रहा है इस....... मैं अपना बात खत्म नहीं कर पाया क्योंकि मैं पलटा तो वहां  लड़की नहीं थी|  शायद सीनियर के डर से वह भाग गया मैंने भी बात  रफा दफा करके चला गया कॉलेज के और | 
                      कॉलेज की पहला दिन मैं क्लास की और चल पड़ा क्लास में बैठा था| टीचर  चपड़ा रही थी लिखते लिखते मे जब  सर उठाया डस्टर  मेरा सिर में लगा मै चिल्लाया..... चोट इतनी लगी थी मेरा सिर में खून  बहा रहा था और चक्कर आ गया था | तभी टीचर  ने आकर मुझसे पूछा  आर यू ओके|  इन्हें भी मे चोट दिखाकर कहां यह देखिए किसने डस्टर को मेरे ऊपर मारा और मेरा सिर फट गया अभी मैंने सिर में हाथ लगाया तो कुछ भी नहीं था  खून या दर्द|  मैं  डर के मारे हॉस्टल की और दौड़ा ,कॉलेज से हॉस्टल की और में एक बड़ा सा ग्राउंड जो मैं दौड़कर जा रहा था पैर मेंकोई मारा  तो मैं गिर पड़ा और मेरा सिर फट गया और खून मेरा गरम गरम के बदले ठंड लगने लगा क्योंकि धूप ज्यादा था | मैं और 2 कदम बढ़ा मेरे पीछे एक परछाई  का कदम मेरे पीछे पीछे आ  रहा था हॉस्टल पहुंचते-पहुंचते मैं पलटा तो देखा परछाई  नहीं थी | 
                            ऐसा लगा किसी ने मेरा पैर में जोर से लात मारा  मैं  मुंह नीचे करके गिर गया और वो परछाई वहीं रुक गया | डर किसको कहते हैं मुझे अब   समझ आया|  हॉस्टल के अंदर सारे सामान रखकर हॉस्टल में सब ठीक था और  कोई दिक्कत नहीं आया  फिर भी अगले दिन में  कॉलेज जाते समय  वहीं लड़की  दिखाई दी|  मैं डर के मारे अपने क्लास के अंदर  चलने  लगा  और पलट के देखा तो   वह लड़की नहीं थी | मेरे सांस में सांस आया और   फिर  देखा की वह लड़की रोती हुई मेरे सामने से आ रही थी और मेरे बगल वाला सीट में बैठ गेई|  मैंडर का  मारे  बाहा से उठकर कॉलेज के बाहर भागा, पहला दिन   कॉलेज से हॉस्टल तक  आ रहा आज मेरे कदम के साथ साथ दूसरी कदम रुकी नहीं थी  पहले हॉस्टल तक फिर फिर रूम तक पीछे के पीछे आते रहे | हॉस्टल पहुंच के अंदर घुसने के मेरा हिम्मत नहीं हो रहा था ,के ओ लड़की मेरी गेट पर खड़ी थी रोती हुई | मैं डर के मारे अपना घर जाने की सोचो और मैं सीधा स्टेशन के और चल पडा  घर के लिए|  ट्रेन खड़ी थी प्लेटफार्म में ,मैं टिकट ले लेकर ट्रेन में जाऊं ट्रेन चल पड़ा और  ट्रेन के ऊपर चढ़ गया |
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ओ लड़की  
                       पागलपन अब थोड़ा रुक गया मन शांत हुआ ,और मैं एक सीट  बेटा ही  था कुछ ही देर में  टीटी को टिकट दिखाने का मेने  गेट के बाहर झांकी के दिखा | पर मैं चुपचाप उठा की और  टॉयलेट की औरचल पड़ा टॉयलेट के पास पहुंचकर देखा तो टीटी बहुत दूर था|  फिर उस वक्त लड़की रोती हुई खड़ी देख कर वहां तक आया था मैं तुरंत टॉयलेट घुस रहा था टॉयलेट की दरवाजा खुला था और सामने चिल्लाया की  मैं बहरा ना हो जाऊं  |  मैं  चिल पड़ा  डर के मारे और टीटी से टकरा गया, मैंने पलट के  देखा टीटी मुझसे  टिकट दिखाने का कहा रहा था|  मैंने साफ साफ कहा दिया कि जल्दी बाजी में  टिकट नहीं ले पाया, पैसा लेकर मामला   रफा दफा कर दो|  टीटी ने मेरा पैर से ऊपर तक  दिखा  और कहा मेरे जैसे अमीर बाप का बिगड़ा हुआ औलाद पैसे से सब कुछ खरीदा नहीं  जाता है और बो मुझे  अगले  स्टेशन में उतार दिया इसके साथ एफ आरपीएफ में मुझे हवाला कर दिया|  पहले तो मुझे मारा मेरे ऊपर फाइन  लगा दिए|  मैं पापा को  फोन किया तो पापा आने मे 4 घंटा लग देय | पापा के आने से वह मामला को संभाला,और  घर की ओर चल पड़े | घर जाता समये रास्ता मे  पापा ने मुझसे पूछते रहे यह सब क्या है?मैने कुछ  नहीं कहा पाया क्योंकि मेरे साथ जो हो रहा था मेरे को भी समझ में नहीं आ रहा|   लेकिन डर क्या होता हैमुझे  समझ में आ रहा था|  जब ड्राइवर ने घर के पास गाड़ी रोका पापा  और मैं जब   घर के अंदर घुसा अचानक मेरा नजर घर के कोने में पड़ा और  देखा वही लड़की रोती हुई नहीं  हंसते हुए खड़ी थी |  मुझे अपना परवाह नहीं थी पर पापा और मम्मी का कुछ भी ना हो जाए यही मैं सोच सोच कर मेरी जान जा रही थी | घर में  आतो गया फिर भी मैं महफूज नहीं था |
                   मैं जब  पापा  को पूरी बात बताइ तो पापा ने मां पर चिल्लाई मुझे पागल कहने  लगे|  उसने आपस में लड़ पड़े आर कुछ फायदा नहीं हुआ वह रोज हमेशा आपस में लड़ते रहते थे ,मे थका हारा हुआ डाइनिंग पर बैठे  गया  और मेरी नजर पापा का पीछे  खिड़की कि  ऊपर नजर पड़ी ओ लड़की के  और बो  धीरे-धीरे हमारा घर की तरफ बढ़ रहा था और मैंने चला कर पापा को कहा  की पापा देखो ना ओ  रही वह लड़की और आ रही है, लेकिन दिखाई नहीं दी और पापा ने और गुस्से में मां के ऊपर  चिल्लाने लगी|  तभी मैंने देखा लड़की का परछाई  दिख रही थी पर्र  दिखाई नहीं दे रहा था  आर ओ सी थे अपना घर में भी हल्की रोशनी में मेरे पापा और मेरे मम्मी के साथ वह भी उस घर में था|  
                          उसी समय  पापा चिल्लाकर बोला बीवी तो बेवकूफ है , नालायक बेटा कहीं क्या मुझे नहीं छोड़ा तो अचानक मां का गुस्सा ज्यादा बढ़ गया पापा को कांच के टुकड़े में जोर से सिर  दिया उसी समयपापा ने  दम तोड़ दिए|  मम्मी ने चिल्लाने लगी अलग आवाज में की बाइक खरीद लेता, जिंदगी खरीद के दिखा मेरा जिंदगी खरीद के दिखा और मेरा परिवार का जिंदगी भी खत्म कर दिया एक भयानक आवाज से|  दरअसल पढ़ाई में कमजोर था मेरे पिताजी ने मेरा इयररिंग कॉलेज का सीट पैसा देकर  खरीद लिया था|  ओ सीट को पहले बही  लड़की को मिला | परंतु बाद में सिर्फ मेरे को पैसे से दिया गया तो बो  परिवार   कर्ज में डूबा गया|  उसका बच्चे और उसका बीवी को जहर देकर खुद जहर पी लिया उश्के  पापा ने |  इसी  बजे से वह लड़की हमारा घर तक परछाई बनकर आ रहा था |  किसी ने सच कहा  बाप का पापों का फल  बेटा को भुगतना पड़ता है|  उसी दिन के बाद आज तक  बो लड़की मुझे  कभी दिखाई नहीं दी, और मैंने कभी इंजीनियरिंगकरने का सोचा भी नहीं| 
                                                                                बस इतनी  सी थी  ए कहानी.                                    

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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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