आखिर चिताजल उठी(short story in hindi)

                                            आखिर चिताजल उठी

जिंदगी के मोड़ पर कभी ऐसी घटना घट जाती है ,जिससे मन के एककाक  जाता है|   पहले तो विश्वास नहीं होता वैज्ञानिक साधु और संतों की बात पर!  परंतु हकीकत उसके साथ एक अजीब ले लेती है तब व्यक्ति उसी समय की बदलती परिस्थिति के देखते ही रह जाता है | पहले तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं होता ! अंत में बह विश्वास करता है की तंत्र मंत्र साधु संत भी एक सच्चाई है    | 
short story  hindi
सीता एंड सुमन 


               उस दिन धुप  मे  जेल जटा बढ़ाए हुए एक  बाबा में चल रहा था लगता था ज्यादा शांति की प्राप्ति इन्हें को हुई है|   वहां के गली में एक दरवाजा पर जाकर  चिल्ला पडताहै  -बच्चा यह साधु को कुछ खाने को मिलेगा
- धैर्यरखो  बाबा थरहै     मैं भीखा   लेकर आ रहा हू |   ये शब्द  सीता   के थे |  बाबाचबुतर  पर बैठकर अंदर से आने वाले को इंतजार करते थे ओर  दखता  नव युवती एक बूढ़ी औरत के साथ हाथ में कुछ लिए हुए आ रही है | 
लीजिए बाबा कुछ रोटियां और तरकारी ओं देते हुए कहां हाथ फैला कर ले  ली और बही   आसन लगाकर जम गए|  खाना खाने के बाद ओ साधु की नजर शकुंतला के चेहरे पर पड़ी साधु थोड़ी देर तक उसके चेहरे को रोचक देखता ही रहा शकुंतला की सास को बहुत बुरा लगा तभी वहां साधु बोल पड़ा बेटी तेरी बहुत बड़ा दुर्भाग्य है|  तेरा भविष्य बहुत ही कष्ट तू 3 महीने के बद.......| 

 क्या बात है बाबा सीता  ने पूछा मैं कैसे कहूं ससमझ  मे  नहीं आता.... तू इतनी छोटी उम्र में ही बधाबा हो जाएगी|  " क्या किसी क्या बात आप कर रही हो बाबा?" सीता  की सास ने कहा! ठीक कहा रहा हूं जिसकी किस्मत में यही लिखा है! भोजन लाइ हमारी आत्मा  तृप्त हो गई|  परन्तु  इसके सामने बहुत बड़ा पहाड़ खड़ा रहा है! बाबा मेरी रक्षा करो आप तो जानते हैं कि के पति  मर जाने के बाद स्त्री की क्या हालत हो जाती है | मैं उनके बिना कैसे जी सकती हूं मेरी मदद करो बाबा नहीं तो मैं भी मर जाऊंगी यह निवेदन करते हुए बाबा के पैर पकड़ लिए| हमें बहुत दूर जाना है मुझे जाने दो..  उधर से आते वक्त बारे में जरूर कुछ उपाय बता कर जाऊंगा| तुम  नेछित  रहो बेटी यह कहकर बाबा ऊटी पकड़कर आगे   चले| और उसकी सांस आंखों में आंसू भर उन्हें जाते देखती रही सोचती रही अपने पति और बेटे के बारे में|   कोई साधु संत संकट में निवारण के लिए लोगों से पूछते रहे वरुण आई निवारण की बात ना हो सकी| 

फिर धीरे धीरे घर के लोग इस बात को भूल गए|   लेकिन सीता तब से ही उदास  रहने लगी और अपने पति को भरपूर प्रेम स्नेहा देने लगी थी| हमेशा के  लिए कभी कभी वह सोच में पड़ जाती थी कुछ दिनों के बाद अरे मेरे पति तोहमेशा के  लिए अलग  हो जाएगा|  तब यह सोचकर आंखों में एक आंसू   उछाल पढ़ते थेपड़ते थे | वाह कोई घंटे  तक सोचती रहती मानों  बहुत विधवा हो गई और उसने सफ़ेद बस्त्र  पहन रखी है | सामने से उसके बच्चे रोते हे कोई खाना तक नहीं देता है! बहा  खुद  भरा पेट   खाना नहीं  खा पाता है|  सारे परिवार  और  समाज  उससे हरदम ताने ही देता रहता है| वहां आत्महत्या तक के सो च लता  परंतु  दो और तीन छोटे-छोटे बच्चे होनेकि कारण   ममता ऐसा करने से रोक देती है|  वह मजबूर होकर इसदुनिया मई जीनका   करती रहती| जीवन  एकदम अंधकारमय हो गया है|  कोई भी भर का व्यक्ति उसे प्यार नहीं करता पहले देवार  ने भाभी भाभी कहकर उसे नाज नखरे उठाया करते थे परंतु आज इस सोच विचार के कारण उसका शरीर मात्र अरे 20 दिनों में इतना कल गया था कि अब मालूम ही नहीं पड़ता था कि वही स्वस्थ खराप होगया था  | सीता  का पति सुमन की सारी बात तो सा दूर था | बहा  जानता भी ना था की उससे तीन-चार महीने के बाद हमेशा हमेशा के लिए या घर क्या यार थोड़ा देना होगा|  एक बार सीता  ने सुमन से कहा बता चाहे कि आप हमें कश्मीर घुमाएं साथ घूमना चाहती हूं क्या मालूम है कि कल क्या हो जाएगा... और शकुंतला तुम किसी बहकी बहकी बात कर रही हो | जिंदगी प्राप्त हुई है उसे हम  खुशी  कुर्बान निभाएंगे नहीं मेरे देवता मैंने घूमने के लिए इच्छा जाहिर की जो ठीक समझे.... सुमन माना गया ठीक है तो सारे सामान की कर लो ना हां क्यों नहीं परन्तु यहाँ बात   मम्मी और डैडी के अवश्य कहे देना सामान  की तैयारी तुम कर सकती हो... सीता  चेहरे को देखती रही और सोचती रही कि शरीर 3 महीनों में हो जाएगा| इसीलिए बाहर चाहती थी कि सुमन के साथ जितना हो सके इतना समय बिता ले|  फिर अगले दिन वह  कश्मीर रबना  हो गए|  सीता  हमेशा सुमन को निहारा करती| एक बार तो सुमन ने उसके निहारते पर पूछ  भी गया सीता क्या बात है उन दिनों  में आप भी ध्यान देने लगी हो |तुम्हारे ध्यान देने से हमारा स्वास्थ्य क्या हो गया है|  

                                यहाँ  तुम्हारी मेहनत का फल है| नहीं मेरे देवता मैं क्या मेहनत करूंगी तो खुद....."  फिर वही झूठ.... " ठीक ही कह रही हूं मैं.... दोनों बातें करते करते देवी के मंदिर में जा पहुंचे | बहा  सीता  वैष्णो मां से सिंदूर की भीख मांगी मैंने आपसे जिंदगी भर कुछ भी नहीं मांगा है | आज एक छोटी सी चीज दे दो ताकि में हर साल आपकी पूजा करने यहां आ सकूं! मां सिर्फ मेरी मांग के सिंदूर की रख लो क्योंकितुम  है  , में एक बेटी के समान हो | क्या कोई मां चाहेगी उसकी बेटी विधवा हो जाए उसकी दुनिया  दुनिया उजड़ जाए क्या तुम चाहोगी?

                                रोते  हुई  तुम ऐसा नहीं चाहोगी सीता  माँ का  चरण में माथा टेक दिया|  कश्मीरी इ ची  समाया सुंदरता के  योबन   पर था चारों तरफ रंग बिरंगी फूल सुबह गीत हो रहे थे स्वर्ग उतर आया है बर्फ गिरी थी पहाड़ों की चोटियों तारा चांदी की तरह जम्मू तवी था चमक रही थी कश्मीरी में घूमते हुए वह दोनों जल भूमि नीली पीली ड्रेस में सच लोगो घूमते फिरते नजर आ रहे थे अपने सुमन के सीने पर सिर रखकर सभी गोमो  को बुला गई थी | मन भी उस समय उसके रूप को देखकर इस कदर पागल हो गया था कि उसे अपने सीने में हमेशा हमेशा के लिए छुपा लेना चाहता था परंतु एक प्रेमिका की तरह सीता चिपक गई थी जिससे सुमन हारे हुए व्यक्ति की तरह हंस हंस कर रहा था फिर भी वह पागल की तरह उससे हमें लगा था छोड़ने लगा था और अंत में शकुंतला का बालों पक्षी की तरह उसके बाहों में आकर फड़फड़ाने लगी थी मैं उससे कसकर अपनी बाहों में सिमट लिया था | अपनी प्रचंड धूप धीरे-धीरे होने लगा था थोड़ी देर में ही अपनी प्राकृतिक छटा लिए हुए दुखने लगा था चूहा बना सा लग रहा था सचमुच लग रहा था कि अपने प्रचंड रूप से थक कर मही झाली  में ठंडा होने जा रहा है |
      सूरज का डूबना  जाप्रतिबिंब झाली में किसी आर्टिस्ट का कल्पना से भी ज्यादा अच्छा लग रहा| था दोनों बाहों में बाहें डालकर इलेक्ट्रिक के रास्ते में घूमते रहे घूमने के बाद दोनों में अपने होटल के ऑल में प्रवेश किया एक एकांत टेबल पर धीमी धीमी मधुर धुनों से आवाज में रात का खाना खाया और अपने कमरे में जाने के लिए मुझे कमरे में कड़कड़ आती ठंड में  लकड़ी की भट्टी   जल रही  थी  वहां जाकर ठंड में आग देखने का मजा लिया बातें करते दोनों सो गए कुछ ही देर के बाद अचानक सीता को उसी समय उसका गला शुरू हो रहा था इसलिए वह पीने के लिए चले गए पानी पीकर वापस आना चाहती थी का दरवाजा  बंद हो गयाहो गया और तेज हवा का झोंका अंदर आ गया बहुत कड़कड़ आती सर्दी में उसने बाथरूम का दरवाजा खोलने चाहा परंतु तभी उसी साधु का चेहरा एकाएक दिखाई दिया चक्की गीत होकर कहा  बाबाआप यहां... |  तुझे कहता के कुछ उपाय बताऊंगा  परन्तु  मई मजबूर हूँ  .... तारा पति  बाद नेचेते हे। ..
| नहीं नहीं  सीता चिकी  ऐसा  कभी नहीं हो सकता है साधु पुनः याद दिला कर चला गया उनका दरवाजा पीटते हुए हैकर चिल्लाती जा रही थी |  क्या हुआ सीता एकाएक सुमन ने बाथरूम का दरवाजा खोल कर कहा| बहा  माँ.... र। ..र। ..   देना चाहता है | सीता होश में आओ यह क्या हो गया तो तुम ठीक ढंग से बात कर रही थी|  उसे बाहों में उठा कर पलंग पर लाकर उसे सीने के लिए प्रेरित किया|  थोड़ा शांत मन हो कर पूछ भयभीत ढंग से उसे देखते देखते सो गई|  सुमन तो सिगरेट का किस्ते किस्ते बारे में सोचता हुआ सो गया| अगला दिन होटल  मे लॉन कॉफे  पीते  सुमन ने पूछा तुम रात को क्या हो गया था?
                             
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बाबा 
  इतनी नर्वस क्यों थी.
? भूत प्रेत तो तंत्र मंत्र आदि पर विश्वास करते हो? नहीं करते हैं क्या बात है जो तुम अभी यह प्रश्न ले बैठी हो? मैं ऐसा इसलिए क्योंकि भूत प्रेत का भी अपना एक अलग अस्तित्व होता है | बात चीती  के अंत में दोनों खिलखिला कर हंसते हुए उड़ गए और खाना खा कर दो मैं निकल गए वह दोनों क्लब में नो स्नोफॉल  क्लब में   मैं काफी देर तक डांसिंग  करने के बाद वह दोनों काफी थके से बिछावन पर जाते ही नींद ने उन्हें अपनी आगोश में सिमट लिया | दोनों तीन-चार दिन घूमने के बाद लौट आए
              बही साधु  घर पर भीक  मांगने आया कोई उपाय बताने की बहाने आया|  था लेकिन घर की कुश्ती उन्होंने उस से हटा कर दिया जब तक शकुंतला ने उसे पहचाना तब तक वह जा चुका था|  और फिर वही हुआ जिसका डर था एकदिन  शादी में शामिल होने के बाद सुमन लौट रहा था | जिस जीप में सुमन  बहुत बैठा था एकबाक  उलट गई उसने वही दम तोड़ दिया लेकिन नहीं जानता था कि सब एक संयोग था उस साधु के  सांप  या होनी| 
                                                                      "   इ थिन थी ए  कहानी"
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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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